Trunk 786: Real Horror story||
Trunk 786: बंद ताबूत का राज़
– अनजाना सफर
रात के अंधेरे में एक पुराना ट्रक राजस्थान के सुनसान हाईवे पर दौड़ रहा था। स्टेयरिंग पर रफीक नाम का ट्रक ड्राइवर था—एक 42 साल का आदमी, जिसने ज़िंदगी का आधा हिस्सा ट्रक चलाने में गुज़ार दिया था। उसके चेहरे पर थकान की लकीरें साफ झलक रही थीं, लेकिन मजबूरी इंसान को आराम कहाँ करने देती है?
रफीक के साथ उसका खलासी अमजद भी था—20-22 साल का दुबला-पतला लड़का, जो कुछ ही महीनों से ट्रकों के साथ सफर कर रहा था। उसकी आँखों में अब भी दुनिया को समझने की चाह थी, लेकिन रफीक के लिए ये सब अब नया नहीं था।
"अमजद, ज़रा थर्मस से चाय निकाल, नींद आ रही है," रफीक ने जमी हुई आवाज़ में कहा।
अमजद ने झट से थर्मस निकाला और दो कटोरी में चाय डाल दी। ट्रक हिचकोले खाता हुआ सुनसान सड़क पर बढ़ता रहा।
"भाईजान, ये माल कहाँ का है?" अमजद ने चाय की चुस्की लेते हुए पूछा।
रफीक ने साइड मिरर में झाँकते हुए जवाब दिया, "पता नहीं बेटा, बस इतना मालूम है कि माल गोदाम से सीधा अजमेर डिलीवर करना है।"
अमजद को थोड़ा अजीब लगा, क्योंकि आमतौर पर रफीक हर माल की जानकारी रखता था, लेकिन इस बार कुछ अलग था।
रहस्यमयी ट्रंक
करीब आधे घंटे बाद, ट्रक एक ढाबे के पास रुका। चारों ओर सन्नाटा था, बस ढाबे के मालिक और कुछ सफरियों के अलावा कोई नहीं था।
रफीक ने बीड़ी जलाकर लंबा कश लिया और ट्रक की ओर देखा। अचानक उसकी नजर ट्रक के अंदर रखे एक बड़े लोहे के ट्रंक पर पड़ी, जिस पर धूल जमी हुई थी और हल्का-सा उखड़ा हुआ "786" लिखा था।
"ये ट्रंक तो पहले नहीं था?" रफीक के माथे पर शिकन आ गई।
अमजद भी चौंक गया। "हाँ भाईजान, मैंने इसे पहले नहीं देखा!"
रफीक के दिमाग में कई सवाल उमड़ने लगे। ये ट्रंक ट्रक में आया कब? इसे रखा किसने? और इसमें क्या है?
कुछ अजीब हो रहा था...
रफीक ने बीड़ी फेंकी और ट्रक के करीब जाकर ट्रंक को गौर से देखने लगा। जैसे ही उसने हाथ बढ़ाया, ढाबे के बूढ़े मालिक ने दूर से ही आवाज़ लगाई—
"ए भाई! उसे मत छूना!"
रफीक और अमजद ठिठक गए। बूढ़ा आदमी लड़खड़ाते कदमों से उनकी तरफ आया।
"क्यों बाबा? इसमें क्या है?" रफीक ने पूछा।
बूढ़े आदमी ने गहरी सांस ली और धीरे से फुसफुसाया, "ये कोई आम ट्रंक नहीं है... इसमें जो है, वो तुम्हारी सोच से परे है!"
(क्या ट्रंक में कुछ भूतिया है? या ये महज एक इत्तेफाक है?
– मौत से पहले की दस्तक
ढाबे के बूढ़े मालिक की बात सुनकर रफीक और अमजद एक-दूसरे को देखने लगे। रात का समय था, सड़कें सुनसान थीं और चारों तरफ एक अजीब-सी चुप्पी थी। रफीक ने बूढ़े आदमी की आँखों में झाँका—वहाँ डर था, एक अनजाना डर!
"बाबा, तुम ऐसा क्यों कह रहे हो? ये ट्रंक तो हमारे ट्रक में लोड किया गया है, इसमें कुछ गलत कैसे हो सकता है?" रफीक ने थोड़ा सख्ती से पूछा।
बूढ़े ने अपने काँपते हाथों से ट्रंक की तरफ इशारा किया, "बेटा, ये ट्रंक कई सालों से घूम रहा है... जो इसे लेकर जाता है, वो या तो जिंदा नहीं रहता, या फिर पागल हो जाता है!"
अमजद की रीढ़ में ठंडी लहर दौड़ गई। उसने घबराकर रफीक की बाजू पकड़ ली, "भाईजान, कहीं सच में कुछ गड़बड़ तो नहीं?"
रफीक हँसा, लेकिन उसकी हँसी में वो पुराना आत्मविश्वास नहीं था। "अरे बाबा, हम रोज़ नया माल ढोते हैं, कोई जिन्न-भूत वाला काम नहीं करते।"
"मालूम है बेटा, लेकिन इस ट्रंक का मामला अलग है…" बूढ़ा आदमी कुछ और कहने ही वाला था कि अचानक पास की बिजली की तारें ज़ोर से हिलने लगीं। हल्की हवा चल रही थी, लेकिन ऐसा लग रहा था मानो कोई अदृश्य ताकत वहाँ मौजूद हो।
रहस्यमयी अतीत
बूढ़े आदमी ने एक गहरी सांस ली और धीमे स्वर में कहा, "करीब 30 साल पहले, एक आदमी इसी ट्रंक को लेकर गया था। उसने इसे खोलने की गलती की... और उसके बाद जो हुआ, वो बताने लायक नहीं है।"
अमजद ने झट से सवाल किया, "क्या हुआ था बाबा?"
बूढ़े की आँखें डबडबा गईं, "उस आदमी को एक वीरान कुएं के पास मरा हुआ पाया गया... उसका चेहरा पहचानने लायक नहीं बचा था!"
अब रफीक भी थोड़ा बेचैन हो गया, लेकिन उसने अपना डर जाहिर नहीं होने दिया। "बाबा, ये सब कहानियाँ हैं। हम इसे अजमेर पहुँचाकर अपने पैसे लेंगे और बात खत्म!"
बूढ़े ने अपना हाथ हवा में लहराया, "अगर इसे ले जाना ही है, तो रात में इसे मत खोलना... और इसे हमेशा बांधकर रखना!"
रफीक ने उसकी बात को मज़ाक में उड़ा दिया और ट्रक की तरफ बढ़ गया। अमजद ने भी उसके पीछे-पीछे चलना शुरू किया।
रास्ते में अजीब घटनाएँ
रात के दो बजे, ट्रक हाईवे पर दौड़ रहा था। सड़कें वीरान थीं, बस कभी-कभी कोई दूसरा ट्रक या कार गुजरती। अमजद ट्रक के अंदर ही ऊँघने लगा था, लेकिन रफीक को नींद नहीं आ रही थी।
अचानक, ट्रक के पिछले हिस्से से ठक-ठक की आवाज़ आई।
रफीक ने झट से शीशे में देखा—कोई नहीं था।
"अमजद, तूने सुना?"
अमजद ने करवट बदली, "क्या भाईजान?"
"कोई ट्रक के पीछे है शायद..." रफीक ने बुदबुदाया।
अमजद सीधा होकर बैठ गया, "क्या सच में?"
रफीक ने ट्रक रोक दिया और नीचे उतरा। उसने टॉर्च जलाकर ट्रक के पीछे देखा, लेकिन वहाँ कुछ नहीं था।
जैसे ही वो ट्रक में वापस चढ़ने लगा, अचानक ट्रंक हिलने लगा...!
रफीक और अमजद दोनों घबरा गए।
"भ...भाईजान, ये कैसे हिल रहा है?" अमजद की आवाज़ कांप रही थी।
रफीक ने कोई जवाब नहीं दिया, बस ट्रंक को घूरता रहा। वो समझ नहीं पा रहा था कि ये सिर्फ हवा की वजह से हुआ था, या सच में कुछ अंदर मौजूद था…!
(क्या ट्रंक के अंदर कुछ है? क्या रफीक इसे खोलने की गलती करेगा?
– ट्रंक के अंदर क्या है?
रफीक और अमजद की धड़कनें तेज़ हो गईं। रात के घने अंधेरे में ट्रक के पिछले हिस्से में रखा ट्रंक अचानक हिलने लगा था। ऐसा लगा जैसे कोई अंदर से उसे धक्का दे रहा हो!
"भाईजान... ये अपने आप हिल कैसे रहा है?" अमजद ने डरते हुए फुसफुसाया।
रफीक ने गहरी सांस ली, बीड़ी को ज़मीन पर फेंका और झटके से ट्रक के पीछे गया।
उसने ट्रंक पर हाथ रखा—ये ठंडा था, लेकिन हल्का सा कंपन महसूस हो रहा था।
"कोई मजाक कर रहा है क्या?" रफीक ने खुद को संभालते हुए कहा, लेकिन अंदर ही अंदर उसका दिल भी तेज़ी से धड़क रहा था।
रात का खौफनाक फैसला
अमजद कुछ कदम पीछे हट गया। "भाईजान, बाबा ने कहा था इसे मत खोलना!"
रफीक ने उसे घूरकर देखा, "और अगर अंदर कोई जानवर निकला तो? या कोई ज़िंदा चीज़?"
अमजद ने काँपते हुए कहा, "अगर... अगर अंदर कुछ और हुआ तो?"
रफीक ने सिर झटक दिया। "बकवास बंद कर। देखता हूँ!"
उसने ट्रंक का जंग लगा हुआ ताला पकड़कर हिलाया—लेकिन ये खुला नहीं। ऐसा लगा जैसे किसी ने इसे अंदर से बंद कर रखा हो।
रफीक को गुस्सा आ गया। उसने ज़ोर से ताले को खींचा, लेकिन तभी…
ट्रंक अचानक खुद-ब-खुद ज़ोर से हिल उठा!
"भाईजान, हटो वहाँ से!" अमजद ने घबराकर चिल्लाया और पीछे हट गया।
रफीक भी अब घबरा गया था। ट्रक का पिछला हिस्सा अजीब-सी कंपकंपी से गूँजने लगा, जैसे वहाँ कोई अदृश्य ताकत मौजूद हो।
"साला... क्या चक्कर है?" रफीक बुदबुदाया और तेजी से ट्रक की केबिन में चढ़ गया।
सड़क पर साया
रफीक ने इंजन स्टार्ट किया और ट्रक को तेज़ी से आगे बढ़ा दिया। लेकिन जैसे ही ट्रक आगे बढ़ा, अमजद ने अचानक डर से चिल्लाया—
"भाईजान, वो देखो!"
रफीक ने तेजी से सामने देखा—सड़क के बीचों-बीच कोई खड़ा था!
एक लंबा साया... पूरी तरह काले कपड़ों में। उसका चेहरा नज़र नहीं आ रहा था, लेकिन ऐसा लगा जैसे वो उनकी तरफ देख रहा हो!
रफीक ने तुरंत ब्रेक लगाया, लेकिन...
जैसे ही ट्रक रुका, वो साया गायब हो गया।
कुछ अजीब हो रहा था...
अमजद ने कांपते हुए कहा, "भाईजान... ये सब क्या हो रहा है?"
रफीक ने कुछ नहीं कहा। उसने बस ट्रक फिर से स्टार्ट किया और बिना पीछे देखे गाड़ी आगे बढ़ा दी।
लेकिन उसके मन में अब सिर्फ एक ही सवाल था—
आखिर इस ट्रंक में क्या है?
(क्या ट्रंक में कोई शापित चीज़ है? क्या वह साया उनके साथ है?
रास्ता जो कभी खत्म नहीं होता
रफीक ने ट्रक की रफ्तार बढ़ा दी। अजमेर हाईवे के दोनों तरफ सिर्फ अंधेरा था, और दूर-दूर तक कोई दूसरी गाड़ी नहीं दिख रही थी। अमजद अब भी सदमे में था, उसके चेहरे से साफ झलक रहा था कि वो जो कुछ देख चुका था, उसे भुला पाना आसान नहीं था।
"भाईजान, आपने भी देखा था ना?" अमजद की आवाज़ अभी भी कांप रही थी।
रफीक ने बिना उसकी तरफ देखे जवाब दिया, "हाँ, लेकिन हमें अब इस बारे में नहीं सोचना चाहिए। हमारा काम ट्रक चलाना है, भूत-प्रेत पकड़ना नहीं।"
लेकिन उसकी खुद की उंगलियाँ भी स्टीयरिंग पर कसकर जमी हुई थीं, जैसे वो खुद को जबरदस्ती काबू में रखने की कोशिश कर रहा हो।
वही रास्ता... फिर से?
ट्रक हाईवे पर तेजी से दौड़ता जा रहा था। सड़क सीधी थी, और दूर तक रोशनी की कोई गुंजाइश नहीं थी। लेकिन कुछ ही देर बाद अमजद ने चौंककर कहा—
"भाईजान, ये ढाबा फिर से आ गया!"
रफीक ने तेजी से सड़क के किनारे देखा।
ये वही ढाबा था, जहाँ वो कुछ घंटे पहले रुके थे।
"नामुमकिन! हम तो हाईवे पर सीधे जा रहे थे!" रफीक की आवाज़ में झुंझलाहट थी।
"भाईजान, ये कोई मज़ाक नहीं है। हमने इस ढाबे से चाय पी थी, वही टूटा हुआ साइनबोर्ड... वही पुराना बल्ब!" अमजद लगभग चीख पड़ा।
रफीक का दिमाग घूमने लगा। उन्होंने कोई गलत मोड़ नहीं लिया था, फिर वो फिर से उसी जगह कैसे पहुँच गए?
पीछे से आती आवाजें
ट्रक की केबिन में एक अजीब-सा सन्नाटा था। लेकिन तभी...
ठक-ठक-ठक...
वही आवाज़!
ट्रंक फिर से हिलने लगा था!
इस बार ये पहले से भी ज़्यादा ज़ोर से हिल रहा था, मानो इसके अंदर कोई छटपटा रहा हो।
अमजद ने ट्रक के पिछले हिस्से की ओर देखा और लगभग चीख पड़ा, "भाईजान, इसमें कुछ है!"
रफीक के चेहरे पर पसीने की बूंदें आ गईं। उसने हिम्मत जुटाई और ट्रक रोका।
"अब तो इसे खोलकर देखना ही पड़ेगा!" उसने कहा।
ट्रंक खुलने वाला था...
रफीक और अमजद ने टॉर्च उठाई और ट्रक के पीछे पहुँचे। ट्रंक अब भी हिल रहा था, लेकिन अब उसमें से हल्की-हल्की सरसराहट भी सुनाई दे रही थी, जैसे कोई अंदर से फुसफुसा रहा हो।
रफीक ने हथौड़ा उठाया और जंग लगे ताले पर ज़ोर से मारा।
"टन्न!"
ताला टूटा और ज़मीन पर गिर पड़ा।
रफीक ने धीरे-धीरे ट्रंक का ढक्कन उठाया...
लेकिन जैसे ही ढक्कन ऊपर उठा, ट्रक की बत्तियाँ एक साथ बंद हो गईं और चारों तरफ अंधेरा छा गया!
और तभी… ट्रंक के अंदर से एक सड़ी-गली लाश की बू हवा में फैल गई!
अगला पार्ट जल्द…
(क्या ट्रंक के अंदर सच में कोई लाश है? या कुछ और?
– ट्रंक के अंदर की खौफनाक हकीकत
रात के अंधेरे में ट्रक की सारी बत्तियाँ अचानक बुझ गई थीं। सिर्फ टॉर्च की रोशनी में ट्रंक का आधा खुला ढक्कन नजर आ रहा था। लेकिन उससे निकलने वाली सड़ी-गली लाश की बदबू इतनी तेज़ थी कि रफीक और अमजद को सांस लेना मुश्किल हो गया।
अमजद ने अपने मुँह पर रुमाल रख लिया, "भाईजान... इसमें क्या है?"
रफीक ने बिना जवाब दिए टॉर्च की रोशनी ट्रंक के अंदर डाली।
और जो उन्होंने देखा, उससे उनकी रूह काँप गई!
ट्रंक के अंदर... एक ममी!
ट्रंक के अंदर काले कपड़ों में लिपटा एक इंसानी शव पड़ा था। उसकी खाल सूखकर पतली हो चुकी थी, चेहरा एकदम पीला और आँखों के गड्ढे गहरे काले थे। ऐसा लग रहा था मानो ये कोई पुरानी ममी हो!
अमजद काँपते हुए पीछे हट गया, "भ... भाईजान! ये... ये आदमी कौन है?"
रफीक के माथे पर पसीना छलक आया। "पता नहीं... लेकिन ये ताजा लाश नहीं लग रही।"
उसने हिम्मत करके ट्रंक के पास हाथ बढ़ाया और जैसे ही उसने लाश को छूने की कोशिश की…
"खर्रर्रर्र..."
शव अचानक काँप उठा!
लाश में हरकत!
अमजद ने चीखकर पीछे की तरफ छलांग लगाई, "भाईजान! ये ज़िंदा है!"
लेकिन रफीक वहीं जम गया। उसने महसूस किया कि वो शव धीरे-धीरे अपनी उँगलियाँ हिला रहा था…
"खर्रर्रर्र..."
शव का मुँह अचानक हल्का सा खुला, और उसके अंदर से एक सरसराती हुई आवाज़ निकली।
"छ... छोड... दो..."
रफीक के रोंगटे खड़े हो गए। उसने अमजद का हाथ पकड़ा और चिल्लाया, "भाग, अमजद! ट्रक में चल!"
दोनों ट्रक की केबिन में कूदे और रफीक ने तेजी से इंजन स्टार्ट किया। ट्रक ने ज़ोर से झटका खाया और हाईवे पर दौड़ पड़ा।
लेकिन जब रफीक ने शीशे में पीछे देखा, तो उसकी साँसें अटक गईं—
ट्रक के पीछे सड़क पर वही लंबा काले कपड़ों वाला साया खड़ा था!
और इस बार… उसकी आँखें सुर्ख लाल चमक रही थीं!
(क्या लाश ज़िंदा थी? वो काला साया कौन है?
– पीछा कर रहा है मौत का साया
रफीक ने ट्रक की रफ्तार बढ़ा दी। इंजन गरजते हुए हाईवे पर दौड़ पड़ा, लेकिन उसके दिल की धड़कनें ट्रक के शोर से भी तेज़ थीं। पीछे सड़क पर खड़ा काला साया अब भी नजर आ रहा था।
अमजद की हालत खराब थी। वह कांपती आवाज़ में बोला, "भाईजान, वो आदमी... वो हमारा पीछा कर रहा है!"
रफीक ने शीशे में फिर से देखा—
वो साया अब ट्रक की तरफ बढ़ रहा था। लेकिन अजीब बात ये थी कि उसके पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे...
रास्ता जो खत्म नहीं होता
हाईवे लंबा था, लेकिन रफीक को अब लग रहा था कि ये सड़क कभी खत्म ही नहीं होगी।
हर दो मिनट बाद उसे वही सड़क किनारे के सूखे पेड़ और टूटी हुई स्ट्रीट लाइट दिखाई देने लगती।
"भाईजान, ये कैसा हाईवे है? हम बार-बार एक ही जगह से गुजर रहे हैं!" अमजद की आवाज़ में घबराहट थी।
रफीक अब समझ चुका था—वे एक भयानक जाल में फँस चुके थे।
ट्रक के अंदर सरसराती आवाज़
"सर्ररर... सर्ररर..."
ट्रक की पिछली बॉडी में कुछ रेंगने की आवाज़ आई।
अमजद ने डरते हुए कहा, "भाईजान, वो ट्रंक में जो लाश थी... कहीं वो हिल तो नहीं रही?"
रफीक को अपनी गर्दन के पीछे ठंडी हवा महसूस हुई। कहीं ऐसा तो नहीं कि… ट्रंक में कुछ और भी था?
उसने ट्रक की बत्तियाँ हाई बीम पर कर दीं और एक्सीलेटर को पूरी ताकत से दबा दिया। ट्रक 100 की स्पीड से दौड़ने लगा।
लेकिन तभी—
"धड़ाम!"
ट्रक के ऊपर ज़ोरदार झटका लगा, जैसे कोई ट्रक की छत पर कूद पड़ा हो!
अमजद ने डरकर ऊपर देखा, "भाईजान, कोई छत पर चढ़ गया!"
रफीक ने तुरंत ब्रेक मारे, लेकिन ट्रक अब भी सरक रहा था। तभी छत से घिसटने की आवाज़ आई, जैसे कोई उसके ऊपर सरक रहा हो।
"टन्न... टन्न... टन्न..."
"भाईजान, कोई ऊपर है!" अमजद लगभग रो पड़ा।
रफीक ने दाँत भींचते हुए ट्रक का दरवाजा खोला और नीचे कूद गया। उसने ऊपर देखा...
लेकिन छत पर कुछ भी नहीं था।
पर तभी—
पीछे से किसी ने धीरे-से उसका नाम पुकारा—
"रफीक..."
रफीक ने झटके से मुड़कर देखा—
और उसकी आँखें डर से फटी रह गईं!
अगला पार्ट जल्द…
(आखिर रफीक ने क्या देखा? ट्रक का पीछा कौन कर रहा है?
– मौत की दस्तक
रफीक ने जैसे ही मुड़कर देखा, उसका खून जम गया।
पीछे वही काला साया खड़ा था!
लेकिन इस बार… उसका चेहरा साफ़ नजर आ रहा था। पीली झुर्रीदार खाल, धंसी हुई लाल आँखें, और होंठों पर एक डरावनी मुस्कान।
"रफीक..."
उसकी आवाज़ इतनी खराश भरी और ठंडी थी कि रफीक के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
अमजद भी दरवाजा खोलकर नीचे कूदा, लेकिन जैसे ही उसने साया को देखा, उसके मुँह से चीख निकल गई—
"भाईजान, भागो!"
साया जो करीब आता जा रहा था
रफीक ने झटपट ट्रक की ओर दौड़ लगाई, लेकिन तभी...
"टन्न!"
ट्रक के ट्रंक का ढक्कन अपने आप बंद हो गया!
अमजद चिल्लाया, "भाईजान, जल्दी करो!"
लेकिन रफीक के पैर जैसे ज़मीन से चिपक गए थे। वो साया धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ रहा था।
हर कदम के साथ, उसकी आँखों की लाल चमक और तेज़ होती जा रही थी।
अचानक बत्तियाँ जल गईं
जैसे ही वो साया रफीक के एकदम करीब पहुँचा, ट्रक की हेडलाइट्स अपने आप तेज़ रोशनी से जल उठीं।
"श्श्श्श्श्श...."
जैसे ही रोशनी उस साए पर पड़ी, वो अजीब-सी आवाज़ निकालते हुए पीछे हटने लगा।
रफीक को तुरंत समझ आ गया—ये रोशनी से बच रहा है!
"अमजद, ट्रक स्टार्ट कर!"
अमजद ने काँपते हाथों से ट्रक का इंजन स्टार्ट किया और रफीक ने पूरी ताकत से एक्सीलेटर दबा दिया।
ट्रक ज़ोर से गरजा और तेज़ रफ्तार से हाईवे पर दौड़ पड़ा।
ट्रक के शीशे में दिख रहा था वो साया...
रफीक ने जब रियरव्यू मिरर में देखा, तो वो साया अब भी हाईवे के बीच खड़ा था।
लेकिन अब वो हँस रहा था...
"तुम बच नहीं सकते..."
उसकी फुसफुसाहट जैसे हवा में गूंज रही थी।
रफीक ने डर के मारे मिरर झुका दिया।
अमजद काँपती आवाज़ में बोला, "भाईजान, ये कौन है?"
रफीक ने जवाब नहीं दिया। लेकिन एक बात साफ थी— ये कोई आम भूत नहीं था।
क्या ये साया फिर से लौटेगा? ट्रंक में क्या रहस्य छुपा है?
– मौत का सामान
ट्रक 100 की स्पीड से हाईवे पर दौड़ रहा था, लेकिन रफीक और अमजद को लग रहा था कि वो किसी ऐसे रास्ते पर हैं जो कहीं नहीं जाता।
अमजद की आवाज़ काँप रही थी, "भाईजान, हम सही जा रहे हैं ना?"
रफीक ने कोई जवाब नहीं दिया। वो बस सड़क पर नज़रें जमाए ट्रक भगाए जा रहा था। लेकिन तभी…
"ठक! ठक! ठक!"
पीछे ट्रक के अंदर से कुछ ज़ोर-ज़ोर से बजने की आवाज़ें आने लगीं।
अमजद घबराकर बोला, "भाईजान, ये आवाज़ें... ट्रंक में से आ रही हैं!"
रफीक ने गहरी सांस ली। उसने ट्रक को सड़क किनारे रोका और नीचे उतरा।
"अब पता करना ही पड़ेगा कि इस ट्रंक में आखिर है क्या!"
ट्रंक खोलने की हिम्मत
रफीक और अमजद ट्रक के पीछे गए। ट्रंक अब भी हल्के-हल्के हिल रहा था, जैसे अंदर कोई ज़िंदा चीज़ बंद हो।
अमजद ने काँपते हाथों से रफीक का कंधा पकड़ा, "भाईजान, कहीं ये... जिन्न तो नहीं?"
रफीक ने कुछ नहीं कहा। उसने एक गहरी सांस ली और झटके से ट्रंक का ढक्कन खोल दिया।
ट्रंक के अंदर... खौफनाक नज़ारा!
ट्रंक के अंदर अब वो लाश नहीं थी!
बल्कि उसकी जगह... एक पुराना, सड़ा-गला ताबूत रखा था!
अमजद ने पीछे हटते हुए कहा, "भाईजान, इसमें ताबूत कब आया?"
रफीक के माथे पर पसीना आ गया। "ये वही चीज़ है जिससे हमें बचना था!"
लेकिन इससे पहले कि वो कुछ और कर पाते…
ताबूत अपने आप खुल गया!
"खर्ररररररर…"
ताबूत के ढक्कन से कई काली, पतली-पतली उंगलियाँ
बाहर निकलीं।
और फिर…
एक कंकाल जैसी ममी बाहर आने लगी!
मुँह सूखा हुआ, आँखें गहरी गड्ढों में धंसी हुई, और उसकी पसलियों के बीच से सफ़ेद धुएँ जैसा कुछ निकल रहा था।
अमजद का हलक सूख गया, "भ... भाईजान! ये... जिंदा है!"
और तभी—
"तुम... मेरे हो!"
उस ममी ने अपनी गहरी, डरावनी आवाज़ में कहा और ताबूत से बाहर निकल आई।
"धड़ाम!"
ट्रक अचानक ज़ोर से झटका खाकर हिल गया।
भागो, नहीं तो मर जाओगे!
रफीक ने अमजद को ज़ोर से धक्का दिया, "भागो!"
दोनों ट्रक की केबिन में कूदे और गियर डालते ही ट्रक को दौड़ा दिया।
पीछे वो ममी तेज़ी से ट्रक की तरफ बढ़ रही थी!
रफीक ने रियरव्यू मिरर में देखा—
वो औरत की ममी अब भी उनके ट्रक के पीछे भाग रही थी।
लेकिन उसकी चाल इंसानों जैसी नहीं थी… वो हवा में तैर रही थी!
और सबसे डरावनी बात—
उसकी आँखों में गहरी लाल चमक थी, और वो मुस्कुरा रही थी!
अगला पार्ट जल्द…
(आखिर इस ताबूत का राज़ क्या है? वो औरत कौन है?
– ममी की खौफनाक सच्चाई
ट्रक पूरी रफ़्तार से भाग रहा था, लेकिन पीछे से आती उस भयानक ममी की फुसफुसाहटें अब भी सुनाई दे रही थीं।
"तुम... मेरे हो..."
रफीक और अमजद का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
अमजद ने कांपती आवाज़ में कहा, "भाईजान, ये कौन है? हमने इस ताबूत को छू भी नहीं था, फिर ये हमें क्यों मारना चाहती है?"
रफीक की नज़र शीशे पर थी। ममी अब भी पीछा कर रही थी, लेकिन अब वो और भी तेज़ी से ट्रक की ओर बढ़ रही थी।
ट्रक की हेडलाइट बंद हो गई!
अचानक, "टन्न!"
ट्रक की हेडलाइट्स एक झटके में बंद हो गईं। पूरी सड़क घुप अंधेरे में डूब गई।
और अगले ही पल—
"धड़ाम!"
कोई ज़ोर से ट्रक के ऊपर कूदा!
अमजद चिल्लाया, "भाईजान, ये ऊपर आ गई!"
रफीक ने ट्रक को तेज़ भगाने की कोशिश की, लेकिन अचानक स्टेयरिंग लॉक हो गया!
"शिट! ये क्या हो रहा है?" रफीक ने घबराकर स्टेयरिंग को घुमाने की कोशिश की, लेकिन ट्रक अब उनके काबू से बाहर था।
छत पर सरकने की आवाज़
"सर्रररर..."
छत पर कुछ रेंगने की आवाज़ आ रही थी। जैसे कोई अपने लम्बे नाखूनों से मेटल पर खरोंच मार रहा हो।
"क्र्रर्रर्र..."
फिर अचानक—
"टन्न!"
छत में एक तेज़ झटका लगा, जैसे किसी ने अपने पंजे गड़ा दिए हों।
अमजद ने डरकर ऊपर देखा, "भाईजान, ये हमें ज़िंदा नहीं छोड़ेगी!"
डरावनी आवाज़ें... और धुआँ
ट्रक के अंदर एक अजीब-सा धुआँ फैलने लगा।
"भाईजान, ये क्या हो रहा है?" अमजद ने खांसते हुए पूछा।
धुएं के साथ अब एक सड़ी-गली लाश की बदबू भी आ रही थी।
रफीक ने महसूस किया कि उसके सिर में ज़बरदस्त चक्कर आ रहा है। उसकी आँखें भारी हो रही थीं।
"नहीं, हमें होश नहीं खोना है!"
ताबूत का राज़ खुला!
तभी अचानक ट्रक के पीछे ज़ोरदार धमाका हुआ और ताबूत का ढक्कन पूरी तरह खुल गया।
रफीक ने जब शीशे में देखा तो उसके होश उड़ गए—
ताबूत के अंदर कोई ममी नहीं थी… बल्कि उसमें एक और ट्रंक रखा था!
और उस ट्रंक पर… 786 लिखा था!
अमजद की आँखें फटी रह गईं, "भाईजान, ये दूसरा ट्रंक कहाँ से आया?"
रफीक के होंठ सूख गए। उसने अपने अंदर की घबराहट को काबू किया और कहा, "हमें इस ट्रंक को फेंकना होगा… वरना हम नहीं बचेंगे!"
लेकिन तभी...
"श्श्श्श्श्श....."
एक ठंडी, सड़ी-गली सांस उनके कानों में पड़ी।
दोनों ने धीरे-से पीछे मुड़कर देखा—
पीछे ममी खड़ी थी!
(आखिर इस दूसरे ट्रंक में क्या है? ये ममी कौन है?
– दूसरा ट्रंक और मौत की परछाईं
रफीक और अमजद सांसें रोककर पीछे मुड़े।
ममी अब ट्रक के अंदर थी!
उसकी गहरी गड्ढों में धंसी लाल चमकती आँखें सीधा रफीक पर टिकी थीं।
"तुम्हें... जाना होगा..."
उसकी आवाज़ सूखी पत्तियों की खड़खड़ाहट जैसी थी।
रफीक और अमजद के बदन में सिहरन दौड़ गई।
दूसरा ट्रंक!
रफीक की नज़र अब उस नए ट्रंक पर पड़ी, जो ताबूत के अंदर मिला था।
इस पर 786 साफ़-साफ़ लिखा हुआ था।
"ये ट्रंक... यहाँ कैसे आया?"
लेकिन सोचने का वक्त नहीं था, क्योंकि...
ममी ने हमला कर दिया!
"कrrrrrrककककक!"
ममी ने एक भयानक चीख मारी और झपटकर रफीक का गला पकड़ लिया!
उसके हड्डियों जैसे हाथों से जलन सी महसूस हो रही थी।
अमजद ने हिम्मत जुटाकर लोहे की रॉड उठाई और ममी के सिर पर दे मारी—
"धड़ाम!"
लेकिन... ममी को कुछ असर नहीं हुआ!
बल्कि वो और भी गुस्से में आ गई!
ट्रक अचानक खुद-ब-खुद चलने लगा!
"भाईजान, ये क्या हो रहा है?" अमजद ने घबराकर ट्रक का गियर देखा—
गियर न्यूट्रल में था, लेकिन ट्रक खुद चल रहा था!
रफीक ने पूरा जोर लगाकर ममी का हाथ हटाया और डैशबोर्ड से कलमा लिखी हुई ताबीज निकालकर ममी की ओर बढ़ाई।
"बिस्मिल्लाह!"
ममी जलने लगी!
जैसे ही ताबीज ममी के सामने आई, वो भयानक चीख मारकर पीछे हट गई।
उसकी त्वचा से धुआँ उठने लगा और वो पीछे हटकर ट्रंक के अंदर गिर पड़ी।
और फिर—
"धड़ाम!"
ट्रंक अपने आप बंद हो गया!
सब कुछ शांत हो गया... लेकिन क्या सच में?
रफीक और अमजद हांफते हुए एक-दूसरे को देखने लगे।
ट्रक अब भी अपने आप चल रहा था।
"अब हमें क्या करना चाहिए, भाईजान?"
रफीक ने एक गहरी सांस ली और कहा,
"हमें इस ट्रंक को किसी भी हालत में फेंकना होगा... और हमेशा के लिए इस जगह से दूर जाना होगा!"
लेकिन क्या ये इतना आसान होगा?
या फिर ये ट्रंक उनकी ज़िंदगी से कभी जाने ही नहीं देगा?
(आखिर इस ट्रंक का असली रहस्य क्या है? क्या ममी दोबारा लौटेगी?
– मौत का पीछा
रफीक और अमजद की साँसे अब भी तेज़ चल रही थीं। ट्रंक अचानक खुद-ब-खुद बंद हो गया था और ट्रक अपने आप दौड़ रहा था।
रफीक ने स्टेयरिंग पकड़कर ट्रक को काबू में करने की कोशिश की, लेकिन ब्रेक काम ही नहीं कर रहे थे!
"भाईजान, ब्रेक मारो!" अमजद ने घबराकर चिल्लाया।
"मैं मार रहा हूँ, लेकिन ये लग नहीं रहे!" रफीक के माथे पर पसीना आ गया।
सामने मौत खड़ी थी!
अचानक, ट्रक की हेडलाइट्स खुद जल गईं और सामने का नज़ारा देखकर दोनों की रूह कांप गई—
सड़क के बीचों-बीच, वही ममी खड़ी थी!
लाल आँखें चमक रही थीं, और उसके चारों ओर अंधेरे की छाया फैली थी।
अमजद ने कांपती आवाज़ में कहा, "भाईजान, ये तो ट्रंक के अंदर चली गई थी, फिर ये यहाँ कैसे आई?"
टक्कर… या मौत?
ट्रक पूरी रफ्तार से ममी की ओर बढ़ रहा था।
रफीक के पास दो ही रास्ते थे—
1. या तो ट्रक मोड़कर खुद को बचाए और खाई में गिर जाए…
2. या सीधा उस भूतिया ममी से टकरा जाए!
रफीक ने साहस जुटाकर स्टेयरिंग घुमाने की कोशिश की, लेकिन...
स्टेयरिंग लॉक हो गया!
"भाईजान, ये हमें मार डालेगी!" अमजद ज़ोर से चिल्लाया।
रफीक ने अपनी पूरी ताकत लगाई और ट्रक के हॉर्न पर हाथ मारा—
"भोंnnnnnnnnnnnnnnnnn!!!"
ममी हवा में गायब हो गई!
जैसे ही हॉर्न बजा, ममी ने एक भयानक चीख मारी और काले धुएँ में बदलकर हवा में गुम हो गई!
लेकिन ट्रक अब भी अपनी रफ्तार से दौड़ रहा था।
रास्ते पर पड़ा खौफनाक निशान
ट्रक के आगे सड़क पर एक अजीब-सा निशान दिखा—
वो इंसानी पैरों का निशान था, लेकिन उल्टे!
अमजद ने काँपते हुए कहा, "भाईजान, ये... इंसानी निशान नहीं लगते!"
रफीक ने कुछ नहीं कहा, बस ट्रक की रफ्तार और तेज़ कर दी।
लेकिन ये ट्रंक... इन्हें इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं था!
अगला पार्ट जल्द…
(क्या रफीक और अमजद इस ट्रंक से पीछा छुड़ा पाएंगे? या फिर ये डरावनी ताकतें उन्हें खत्म कर देंगी?
– ट्रक के अंदर कोई और था!
रफीक और अमजद ने तेज़ रफ्तार में ट्रक भगाया, लेकिन उनके दिलों की धड़कनें अब भी तेज़ थी।
पीछे जो कुछ हुआ, वो सिर्फ़ एक वहम नहीं हो सकता था।
ट्रक में किसी के होने का अहसास...
कुछ मिनट बाद माहौल थोड़ा शांत हुआ।
अमजद ने गहरी सांस ली और धीरे से कहा, "भाईजान, अब क्या करें?"
रफीक ने ट्रक पर नियंत्रण पा लिया था और सोचा, "हमें इस ट्रंक से छुटकारा पाना होगा... लेकिन कैसे?"
लेकिन तभी…
पीछे से हल्की-सी खटखटाने की आवाज़ आई!
"ट… ट… ट… टक…"
अमजद के शरीर में झुरझुरी दौड़ गई। उसने घबराकर पीछे देखा—
ट्रंक हिल रहा था!
ट्रक के शीशे में एक परछाईं
रफीक ने ट्रक के साइड मिरर में देखा, तो उसे एक परछाईं दिखाई दी।
कोई पीछे की सीट पर बैठा था!
"भाईजान, ट्रक में कोई और भी है!"
रफीक के हाथ ठंडे पड़ गए।
उसने धीरे-से शीशे में दोबारा देखा—
वही ममी ट्रक के अंदर बैठी थी!
लेकिन अबकी बार…
उसके चेहरे की जगह एक काले साए की शक्ल थी, और आँखों में खून जैसा लाल रंग था!
ट्रक के अंदर की डरावनी फुसफुसाहट
अचानक—
"श्श्श्श्श... तुम्हें जाना होगा..."
ट्रक में ठंडी हवा दौड़ गई।
रफीक और अमजद को लगा जैसे उनकी सांसें रुक जाएंगी।
अमजद ने कांपती आवाज़ में कहा, "भाईजान, हमें इस ट्रंक को फेंक देना चाहिए, अभी के अभी!"
लेकिन ट्रंक खुद-ब-खुद खुल गया!
"क्लिक!"
ट्रंक का ढक्कन अपने आप खुल गया।
और उसमें से…
एक हाथ निकला!
अगला पार्ट जल्द…
(आखिर ट्रंक में क्या छिपा था? क्या रफीक और अमजद बच पाएंगे?
– ट्रंक के अंदर से निकली मौत
ट्रक के अंदर पसरा सन्नाटा अब भयानक सिहरन में बदल चुका था।
ट्रंक का ढक्कन अपने आप खुल गया था!
और उसमें से…
एक कटा-फटा हाथ बाहर निकला!
हाथ... जो इंसानी नहीं था!
रफीक और अमजद की आँखें फटी रह गईं।
वो हाथ सूखा, जला हुआ और काले नाखूनों से भरा था।
हाथ धीरे-धीरे ट्रंक से बाहर आ रहा था, जैसे किसी ने उसके अंदर से खुद को खींचने की कोशिश की हो।
"बिस्मिल्लाह..."
रफीक ने कांपती आवाज़ में कहा और झट से ट्रंक का ढक्कन बंद करने के लिए आगे बढ़ा—
लेकिन तभी...
हाथ ने अमजद की कलाई पकड़ ली!
"आआआआआह!"
अमजद दर्द से चीख पड़ा।
उस हाथ की छुअन ठंडी नहीं, बल्कि आग की तरह जलती हुई थी!
"भाईजान, ये छोड़ नहीं रहा!"
रफीक ने झट से पास पड़ा लोहे का रॉड उठाया और उस हाथ पर पूरी ताकत से वार किया—
"धड़ाम!"
लेकिन...
हाथ गायब हो गया!
जैसे ही लोहे की छड़ लगी, हाथ धुएँ में बदलकर ट्रंक के अंदर समा गया।
ट्रंक का ढक्कन धड़ाम से खुद-ब-खुद बंद हो गया।
अमजद ने हांफते हुए अपनी कलाई देखी—
कलाई पर काले जलने के निशान थे!
"अब ये हमारे पीछे पड़ेगा!"
रफीक ने ट्रक की स्पीड बढ़ा दी।
"हमें इस ट्रंक को कहीं फेंकना होगा, इससे पहले कि..."
लेकिन उसके शब्द अधूरे रह गए।
क्योंकि...
ट्रक के शीशे में वही डरावना चेहरा फिर दिखा!
ट्रक के पिछले शीशे में…
वही लाल आँखों वाला काला चेहरा उन्हें घूर रहा था!
और इस बार, उसके होंठ हिल रहे थे—
"तुम इसे फेंक नहीं सकते..."
अगला पार्ट जल्द…
(क्या रफीक और अमजद इस ट्रंक से छुटकारा पा सकेंगे? या फिर ये ट्रंक उनकी मौत की वजह बनेगा?
भूतिया मील का पत्थर
रफीक और अमजद की सांसें अभी भी तेज़ चल रही थीं। ट्रक की हेडलाइट्स में सड़क धुंधली दिख रही थी, और मन में अजीब-सा डर बैठ गया था।
पीछे ट्रंक में कुछ था, लेकिन क्या?
सामने आया एक मील का पत्थर… लेकिन!
अचानक, ट्रक की रोशनी में एक मील का पत्थर दिखा।
लिखा था—
"क़ब्रिस्तान – 786 मीटर"
अमजद का चेहरा सफेद पड़ गया।
"भाईजान, ये जगह कौन-सी है? ये नाम पहले कभी नहीं सुना!"
रफीक ने भौंहें चढ़ाई, "इतनी बार इस रास्ते पर आया हूँ, लेकिन इस मील के पत्थर को कभी नहीं देखा!"
लेकिन कुछ और भी था…
रफीक ने ट्रक की हेडलाइट्स और तेज़ कीं, तो पत्थर के नीचे हल्का सा कुछ लिखा था—
"जो यहां रुका, वो जिंदा नहीं बचा..."
मील का पत्थर… अचानक बदल गया!
अमजद ने एक बार फिर पत्थर की तरफ देखा—
अब उस पर कुछ और लिखा था!
"786 मीटर नहीं... अब सिर्फ 500 मीटर दूर!"
"भाईजान, ये क्या हो रहा है!"
रफीक ने ट्रक की स्पीड और तेज़ कर दी।
लेकिन तभी...
"घड़ाक!"
ट्रक के टायर के नीचे कुछ आया।
ट्रक ज़ोर से झटका खाकर रुक गया।
सामने पड़ा था एक ताबूत!
रफीक और अमजद की आँखें फटी की फटी रह गईं।
सड़क के बीचों-बीच…
एक पुराना लकड़ी का ताबूत रखा था!
और उस पर लाल रंग से लिखा था—
"Trunk 786"
अमजद की जुबान से एक शब्द नहीं निकला।
रफीक ने धीरे से कहा, "ये... ये नाम... हमारे ट्रक
के ट्रंक पर भी लिखा है!"
ताबूत का ढक्कन हिलने लगा…
"टक... टक... टक..."
ताबूत के अंदर कुछ हरकत कर रहा था!
और फिर...
ताबूत का ढक्कन धीरे-धीरे खुलने लगा!
(आखिर ताबूत में क्या था? क्या ये ट्रंक और ताबूत का कोई रिश्ता है?
रफीक और अमजद सामने पड़े ताबूत को देखकर सन्न रह गए।
सड़क के बीचों-बीच रखा पुराना लकड़ी का ताबूत, जिस पर लाल रंग से लिखा था—
"Trunk 786"
लेकिन इससे भी ज़्यादा डरावनी बात ये थी कि…
ताबूत का ढक्कन खुद-ब-खुद हिल रहा था!
"टक… टक… टक…"
अमजद की आवाज़ कांप रही थी, "भाईजान, ये खुद हिल रहा है… ये कैसे हो सकता है?"
रफीक ने खुद को संभाला और धीरे-से ट्रक का गियर बदला, "हमें इसे यहीं छोड़कर निकल जाना चाहिए!"
लेकिन जैसे ही उसने एक्सेलेरेटर दबाया—
"धड़ाम!"
ट्रक के चारों टायर ज़मीन में धंस गए!
ट्रक एक झटके में रुक गया, जैसे किसी ने उसे ज़मीन से बांध दिया हो।
अमजद ज़ोर से चिल्लाया, "भाईजान, ट्रक आगे क्यों नहीं बढ़ रहा?"
रफीक ने घबराकर गियर बदला, लेकिन ट्रक एक इंच भी नहीं हिला।
और फिर…
"क्लिक!"
ताबूत का ढक्कन धीरे-धीरे खुल गया!
ताबूत के अंदर... एक खौफनाक ममी!
ताबूत खुलते ही, उसके अंदर से एक जली-सड़ी ममी बाहर आई।
उसके शरीर पर काले जले हुए कपड़े थे, और चेहरा…
चेहरे की जगह सिर्फ़ हड्डियाँ और गहरे काले गड्ढे थे, जहाँ कभी आँखें रही होंगी!
ममी ने धीरे से अपना हाथ उठाया…
रफीक और अमजद की धड़कनें तेज़ हो गईं।
ममी ने धीरे से अपना जला हुआ हाथ आगे बढ़ाया, और फिर...
ट्रंक का ढक्कन खुद-ब-खुद खुल गया!
ट्रक के पीछे रखा Trunk 786 भी अपने आप खुल गया!
और उसमें से कई कंकालों के हाथ बाहर निकल आए!
"भाईजान, ये ट्रंक और ताबूत... जुड़े हुए हैं!"
अमजद की आवाज़ सिहरन से भरी हुई थी।
और फिर ताबूत के अंदर से एक गूंजती आवाज़ आई…
"तुम इसे छोड़कर जा नहीं सकते…"
(क्या रफीक और अमजद इस ताबूत और ट्रंक के राज़ को सुलझा पाएंगे? या फिर ये डरावनी ताकतें उन्हें खत्म कर देंगी?
ताबूत के अंदर से निकली जली-सड़ी ममी धीरे-धीरे ट्रक की ओर बढ़ रही थी।
अमजद का चेहरा सफेद पड़ चुका था।
"भाईजान, हमें कुछ करना होगा... ये हमें मार डालेगी!"
रफीक ने पूरी ताकत से ट्रक स्टार्ट करने की कोशिश की—
लेकिन ट्रक की बैटरी जैसे डेड हो चुकी थी!
ममी ने अपना हाथ ट्रक पर रख दिया…
जैसे ही ममी ने अपना जला हुआ हाथ ट्रक के बोनट पर रखा—
"टच!"
ट्रक के पूरे बॉडी पर जलने के निशान पड़ गए!
हाथ लगते ही ट्रक का लोहा जलने लगा, जैसे किसी ने उसे आग में डाल दिया हो।
अमजद रोने जैसा हो गया, "भाईजान, ये हमें ज़िंदा नहीं छोड़ेगी!"
ताबूत और ट्रंक का कनेक्शन…
तभी रफीक की नज़र पीछे रखे Trunk 786 पर पड़ी।
उसका ढक्कन अब भी खुला था।
और अंदर से हड्डियों वाले हाथ बाहर लटक रहे थे।
रफीक की आँखों में अचानक एक ख्याल आया—
"अगर हमने इस ट्रंक को खोला, तो शायद हमें इसका जवाब मिल जाए!"
ममी की खौफनाक चीख…
रफीक ने कांपते हाथों से ट्रंक का ढक्कन पूरी तरह खोल दिया—
"क्रीईईक!"
और तभी...
ममी ने एक भयानक चीख मारी!
"क़आआआआआ!"
और ममी जलने लगी!
ट्रंक खुलते ही ममी का शरीर धुएँ में बदलने लगा।
उसकी हड्डियाँ टूटने लगीं, और वो ज़मीन पर गिरकर राख में बदलने लगी।
अमजद ने हैरानी से कहा, "भाईजान, ट्रंक खुलते ही ये जलने क्यों लगी?"
ट्रक अपने आप स्टार्ट हो गया!
और तभी...
"घर्रर्रर्र..."
ट्रक खुद-ब-खुद स्टार्ट हो गया!
रफीक ने बिना कुछ सोचे गियर डाला और एक्सेलेरेटर दबा दिया—
"गड़गड़गड़..."
ट्रक तेज़ रफ्तार में उस ताबूत को कुचलता हुआ निकल गया।
लेकिन... ट्रंक अब भी पीछे था!
रफीक और अमजद अब भी उस ट्रंक को साथ लेकर भाग रहे थे।
और शायद...
ये डरावनी रात अभी खत्म नहीं हुई थी!
(क्या ट्रंक और भी भयानक रहस्य छिपा रहा है? क्या ममी के जल जाने से ये सब खत्म हो गया? या फिर असली खौफ अब शुरू होगा?
ट्रंक की हलचल और नए खतरे
रफीक ने ट्रक की रफ्तार तेज़ कर दी।
सामने सिर्फ़ अंधेरा और धुंध थी, और पीछे…
Trunk 786 अब भी ट्रक के पीछे पड़ा था।
लेकिन ट्रंक के अंदर हलचल थी!
अचानक, ट्रंक से कुछ अजीब-सी आवाज़ें आने लगीं।
"खट... खट... खट..."
अमजद ने काँपते हुए कहा, "भाईजान, ट्रंक के अंदर कुछ है!"
रफीक ने गहरी सांस ली, "जो भी है, हमें इसे फेंक देना चाहिए!"
ट्रंक को फेंकने की कोशिश…
रफीक ने ट्रक को एक झटके से रोका और अमजद से कहा, "चल, इसे नीचे गिरा!"
अमजद ने धीरे से ट्रंक को उठाने की कोशिश की...
लेकिन...
ट्रंक का वज़न अचानक बढ़ गया!
अमजद चीख पड़ा, "भाईजान, ये पहले हल्का था… अब इतना भारी कैसे हो गया?"
रफीक ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन जैसे ही उसने ट्रंक को छूने की कोशिश की—
"चक!"
ट्रंक का ढक्कन खुद-ब-खुद खुल गया!
और अंदर का नज़ारा देखकर दोनों के होश उड़ गए—
ट्रंक के अंदर अब एक नई लाश थी!
रफीक और अमजद सन्न रह गए।
अंदर एक अधजली लाश पड़ी थी, जिसकी आँखें अब भी खुली थीं।
अमजद कांपते हुए बोला, "ये... ये कौन है?"
रफीक ने डरते हुए लाश के चेहरे को गौर से देखा—
"अरे… ये तो वही आदमी है जो हमें पिछले ढाबे पर मिला था!"
अमजद ने भी ध्यान से देखा—
वही आदमी, जिसने उन्हें रात के खाने के बाद आगे न जाने की चेतावनी दी थी।
और अब…
वो मर चुका था!
अचानक लाश की आँखें हिलने लगीं!
"टक...टक..."
अमजद झट से पीछे हटा, "भाईजान, ये लाश हिल रही है!"
रफीक ने तुरंत ट्रंक का ढक्कन बंद कर दिया।
लेकिन ट्रंक खुद-ब-खुद हिलने लगा!
अब ट्रंक से सिर्फ़ आवाज़ नहीं, बल्कि...
रफीक और अमजद के चारों ओर अजीब-सा दबाव महसूस होने लगा।
जैसे कोई अनदेखी ताकत हवा में घूम रही हो!
और तभी पीछे से एक और आवाज़ आई—
"ये ट्रंक अब तुम्हारा हो गया है..."
रफीक और अमजद ने पीछे मुड़कर देखा—
लेकिन वहाँ कोई नहीं था!
अगला पार्ट जल्द…
(क्या ट्रंक को फेंकना मुमकिन होगा? या फिर अब ये दोनों की जान का दुश्मन बन चुका है?
मौत का साथी
"ये ट्रंक अब तुम्हारा हो गया है..."
रफीक और अमजद के रोंगटे खड़े हो गए।
पीछे देखा— कोई नहीं था।
लेकिन वो आवाज़ अब भी गूंज रही थी।
अमजद हकलाया, "भाईजान, ये... ये आवाज़ कहाँ से आई?"
रफीक ने ट्रंक को घूरते हुए कहा, "हमें इसे फेंक देना होगा!"
ट्रंक का रहस्यमयी भार
रफीक और अमजद ने मिलकर ट्रंक उठाने की कोशिश की—
लेकिन ये पहले से भी भारी हो गया था!
इतना भारी कि उसे हिलाना भी मुश्किल था!
अमजद घबराकर बोला, "भाईजान, ऐसा लग रहा है कि ये हमें छोड़ने नहीं देगा!"
ट्रक का इंजन बंद हो गया!
अचानक…
"धड़ाम!"
ट्रक का इंजन खुद-ब-खुद बंद हो गया।
ट्रक के अंदर अजीब-सी गंध भरने लगी, जैसे सड़ी हुई लाशों की बदबू।
रफीक ने कांपते हुए चाबी घुमाई—
"घर्रर्रर्र... खट!"
इंजन ने स्टार्ट होने से मना कर दिया।
अमजद ने डरते हुए कहा, "भाईजान, हमें कुछ करना होगा, वरना ये ट्रंक हमें मार डालेगा!"
और फिर… ट्रंक से किसी के बोलने की आवाज़ आई!
"तुम इस ट्रंक से छुटकारा नहीं पा सकते..."
"जब तक ये ट्रंक है, मौत तुम्हारे साथ रहेगी..."
रफीक और अमजद ने एक-दूसरे की ओर सहमकर देखा।
ट्रंक के अंदर से ठक-ठक की आवाज़ें…
अब ट्रंक से ठक-ठक की आवाज़ें आ रही थीं।
जैसे कोई अंदर से बाहर आने की कोशिश कर रहा हो!
अमजद चीख पड़ा, "भाईजान, इसे खोलना मत!"
रफीक ने गहरी सांस ली।
"हमें इसे हमेशा के लिए खत्म करना होगा!"
क्या वे इस श्रापित ट्रंक से छुटकारा पा सकेंगे? या मौत अब उनके साथ रहेगी?
रफीक और अमजद के सामने अब सिर्फ़ एक ही रास्ता बचा था—
"हमें इस ट्रंक को जला देना होगा!"
ट्रंक को आग लगाने की योजना
अमजद ने ट्रक में रखे डीज़ल के डिब्बे की ओर इशारा किया।
"भाईजान, अगर हम इस पर डीज़ल डालकर आग लगा दें तो शायद यह नष्ट हो जाए!"
रफीक ने हामी भरी, "और कोई रास्ता नहीं है। ये ट्रंक जब तक हमारे साथ रहेगा, तब तक मौत हमारे पीछे रहेगी!"
जंगल के बीच जलती हुई रात
रफीक और अमजद ने ट्रंक को घसीटकर सड़क के किनारे एक खाली जगह पर रखा।
चारों ओर घना जंगल था, अंधेरा और रहस्यमयी खामोशी।
अमजद ने हाथ में डीज़ल का डिब्बा उठाया और धीरे-धीरे ट्रंक पर उड़ेल दिया।
रफीक ने जेब से माचिस निकाली—
"अब ये खत्म हो जाएगा!"
माचिस की तीली जली...
"छर्र..."
रफीक ने जलती हुई तीली ट्रंक पर फेंकी—
"भड़ाक!"
आग की लपटें तेज़ी से उठीं, और देखते ही देखते ट्रंक जलने लगा।
लेकिन फिर कुछ अजीब हुआ…
आग की लपटें नीली और हरी हो गईं!
और ट्रंक के अंदर से चीखने की आवाज़ें आने लगीं—
"आआआआ... मुझे छोड़ दो!"
अमजद पीछे हट गया, "भाईजान, ये कोई सामान नहीं… ये कुछ और ही है!"
ट्रंक खुद-ब-खुद हिलने लगा!
आग की लपटों के बीच ट्रंक तेज़ी से कांपने लगा।
"धड़ाम! धड़ाम!"
ऐसा लग रहा था कि कोई अंदर से बाहर आने की कोशिश कर रहा हो!
फिर अचानक… आग बुझ गई!
हाँ, आग अपने आप बुझ गई!
और ट्रंक… सही-सलामत पड़ा था!
ट्रंक की ओर से धीमी, डरावनी हँसी आई—
"हा...हा...हा... तुम मुझे खत्म नहीं कर सकते..."
रफीक और अमजद के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
अमजद ने कांपते हुए कहा, "भाईजान, अब क्या करें? ये आग से भी नहीं जला!"
रफीक ने गहरी सांस ली और कहा—
"हमें इसे हमेशा के लिए दफनाना होगा!"
लेकिन क्या ट्रंक दफनाने से सच में खत्म हो जाएगा? या इसके अंदर का राज़ और भी भयानक है?
"हमें इसे हमेशा के लिए दफनाना होगा!"
रफीक और अमजद के पास अब कोई और चारा नहीं था।
आग भी इस ट्रंक को नष्ट नहीं कर पाई।
रफीक ने हिम्मत जुटाते हुए कहा, "इससे पीछा छुड़ाने का बस एक ही तरीका बचा है – इसे ज़मीन में दफना देना!"
अँधेरी रात, डरावना जंगल
ट्रक से कुछ दूरी पर एक वीरान इलाका था, जहां सिर्फ़ सूखे पेड़ और झाड़ियों के सिवा कुछ नहीं था।
चारों ओर सिर्फ़ सन्नाटा था और कभी-कभी झींगुरों की आवाज़ सुनाई देती।
अमजद ने काँपती आवाज़ में कहा, "भाईजान, क्या ये सही फैसला है?"
रफीक ने जवाब दिया, "अगर इसे ज़मीन निगल ले, तो शायद ये हमें छोड़ दे!"
खुदाई शुरू हुई…
रफीक और अमजद ने फावड़ा उठाया और गड्ढा खोदना शुरू किया।
मिट्टी गीली और ठंडी थी, जैसे अंदर कुछ पहले से ही दफन हो!
अचानक… जमीन के नीचे से कुछ टकराया!
"ठक!"
अमजद ने घबराकर कहा, "भाईजान, नीचे कुछ है!"
रफीक ने और गहराई में खोदा—
और फिर कुछ बाहर निकला...
एक पुराना, जला हुआ ताबूत!
ट्रंक के नीचे पहले से ही एक ताबूत दफन था!
अमजद ने घबराकर फावड़ा गिरा दिया।
"या अल्लाह, ये कहाँ फँस गए!"
रफीक ने धड़कते दिल से ताबूत को गौर से देखा।
उस पर कुछ लिखा था...
"786... मौत का साथी..."
रफीक और अमजद एक-दूसरे को देखकर सन्न रह गए।
"क्या ये भी उसी श्रापित चीज़ का हिस्सा है?"
तभी अचानक… ट्रंक खुद-ब-खुद गड्ढे में गिर गया!
और फिर…
ताबूत अपने-आप खुलने लगा!
अंदर कुछ था... जो हिल रहा था!
रफीक और अमजद की आँखें फटी रह गईं।
अचानक ताबूत से एक कंकाल निकला!
उसकी खाली आँखों के गड्ढों से काली धुआं निकल रही थी!
कंकाल ने धीरे से सिर उठाया और कहा—
"तुम इस ट्रंक को नहीं छोड़ सकते... ये अब तुम्हारा हो चुका है!"
अमजद चीख पड़ा, "भागो भाईजान!"
लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी…
क्या रफीक और अमजद इस मौत के साये से बच पाएंगे? या ट्रंक 786 हमेशा उनके साथ रहेगा?
"तुम इस ट्रंक को नहीं छोड़ सकते… ये अब तुम्हारा हो चुका है!"
कंकाल की गहरी, डरावनी आवाज़ ने रफीक और अमजद की रूह तक को झकझोर दिया।
उसकी खाली आँखों के गड्ढों से काले धुएँ की लहरें निकल रही थीं।
ताबूत खुद-ब-खुद खुल गया और उसके अंदर से एक सड़ा-गला हाथ बाहर निकला!
अमजद बुरी तरह घबरा गया, "भाईजान, यहाँ से निकलो!"
लेकिन…
रफीक के पैर ज़मीन में जैसे जम गए थे!
उसका शरीर कांप रहा था, लेकिन वो हिल भी नहीं पा रहा था!
कंकाल धीरे-धीरे उनकी ओर बढ़ने लगा…
"खच... खच..."
हर कदम के साथ उसकी हड्डियाँ चटक रही थीं!
रफीक की साँसें तेज़ हो गईं—
"या अल्लाह, ये क्या बला है!"
अमजद ने हिम्मत जुटाकर रफीक का हाथ पकड़ा और ज़ोर से खींचा—
"चलो भाईजान, जल्दी!"
भागने की कोशिश
रफीक और अमजद तेज़ी से ट्रक की ओर भागे।
लेकिन तभी…
"धड़ाम!"
ट्रक के सारे दरवाज़े अपने-आप लॉक हो गए!
रफीक ने झट से जेब से चाबी निकाली—
चाबी डालकर घुमाई…
लेकिन…
इंजन स्टार्ट नहीं हुआ!
पीछे देखा… तो कंकाल अब ट्रंक के अंदर समा रहा था!
और ट्रंक… धीरे-धीरे हवा में उठने लगा!
ट्रंक से अजीब-सी फुसफुसाहटें आने लगीं…
"तुम बच नहीं सकते..."
"अब तुम इस श्राप का हिस्सा बन चुके हो..."
रफीक ने घबराकर ट्रक का हॉर्न बजाने की कोशिश की—
"पीं... पीं..."
लेकिन हॉर्न की आवाज़ बदल चुकी थी!
अब हॉर्न से किसी औरत की चीखें सुनाई दे रही थीं!
"आआआआह्ह्ह्ह!!"
अमजद बुरी तरह काँपने लगा, "भाईजान, ये क्या हो रहा है!"
फिर अचानक… ट्रंक ज़मीन पर गिर पड़ा!
"धड़ाम!!"
और हर चीज़ फिर से शांत हो गई…
सबकुछ पहले जैसा लगने लगा।
जंगल की हवा फिर से बहने लगी।
झींगुरों की आवाज़ फिर से सुनाई देने लगी।
रफीक और अमजद एक-दूसरे की ओर देखने लगे।
क्या हुआ? क्या सब खत्म हो गया?
लेकिन…
ट्रक के शीशे पर कुछ लिखा हुआ था…
किसी ने खून से लिखा था—
"786… ये खेल अभी खत्म नहीं हुआ!"
रफीक और अमजद की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा।
"भाईजान, ये क्या हो रहा है?" अमजद की आवाज़ काँप रही थी।
रफीक ने शीशे से नज़र हटाई और ट्रंक की ओर देखा—
ट्रंक खुल चुका था… और अंदर कुछ था!
"धक... धक..."
ट्रंक के अंदर से दिल की धड़कन जैसी आवाज़ें आ रही थीं!
रफीक और अमजद सांस रोके खड़े रहे।
अचानक ट्रंक के अंदर से…
एक सफेद चादर में लिपटी हुई लाश निकली!
"आआआआह!!"
अमजद पीछे हट गया, "भाईजान, ये क्या मुसीबत है!"
लाश धीरे-धीरे उठने लगी!
चादर हट गई…
और उसके नीचे था…
एक सड़ा-गला इंसानी चेहरा!
"रफीक… मुझे पहचानते हो?"
रफीक की आँखें फटी की फटी रह गईं—
"न… नहीं… तू कौन है?"
लाश की आँखें लाल हो गईं…
"मैं वही हूँ… जिसे तुमने मारा था!"
अमजद हक्का-बक्का रह गया, "भाईजान, आपने किसी को मारा था?"
रफीक के चेहरे पर पसीना था।
"न… नहीं… ये झूठ बोल रहा है!"
लेकिन तभी…
लाश ने अपने सड़े-गले हाथ से ट्रंक की ओर इशारा किया।
ट्रंक के अंदर अब एक नया दृश्य था—
वहां रफीक खुद खड़ा था…
खून से सने हाथों के साथ!
अमजद ने काँपते हुए कहा, "भाईजान… ये सच है?"
रफीक की पुरानी गलती…
रफीक की सांसें तेज़ हो गईं।
"नहीं… ये झूठ है! मैंने कभी किसी को नहीं मारा!"
लेकिन ट्रंक के अंदर कुछ और ही दिख रहा था…
एक पुराना, सुनसान इलाका…
और वहां…
रफीक… किसी को गड्ढे में धकेल रहा था!
अमजद की आँखों में डर था, "भाईजान… आपने क्या किया था?"
रफीक कुछ नहीं कह सका।
लेकिन अब वो समझ चुका था—
"ये ट्रंक मेरे पुराने पापों की सजा देने आया है!"
रफीक के दिल की धड़कन तेज़ हो गई।
उसके सामने वही सड़ा-गला इंसान खड़ा था, जो कह रहा था—
"तूने मुझे मारकर ज़मीन में गाड़ दिया था, याद है?"
अमजद एकदम सन्न था।
"भाईजान, क्या ये सच है?"
रफीक के होठ सूख चुके थे।
"नहीं… नहीं, ये झूठ बोल रहा है!"
लेकिन ट्रंक के अंदर की झलक साफ दिखा रही थी—
पाँच साल पहले…
एक वीरान सड़क…
रात का अंधेरा…
रफीक अपने ट्रक के पास खड़ा था और सामने एक आदमी ज़मीन पर पड़ा हुआ तड़प रहा था।
"रफीक… मुझे मत मारो!"
लेकिन रफीक के हाथ में एक बड़ा पत्थर था… और अगले ही पल—
"धड़ाम!"
रफीक ने पत्थर उसके सिर पर मार दिया।
खून बिखर गया… और वो आदमी तड़पता हुआ शांत हो गया।
वापस वर्तमान में…
अमजद का चेहरा फक्क पड़ गया।
"भाईजान… आपने किसी की जान ली थी?"
रफीक की आँखें लाल हो गईं।
"ये सच नहीं है! मैं मजबूर था!"
सड़े-गले इंसान ने डरावनी हँसी हँसी…
"अब वक्त आ गया है, रफीक… तेरी सज़ा पूरी होने का!"
वो धीरे-धीरे रफीक की ओर बढ़ने लगा।
रफीक पीछे हटने लगा… लेकिन ट्रक का दरवाजा लॉक हो चुका था!
अमजद डर के मारे कांप रहा था।
"भाईजान, ये हमसे क्या चाहता है?"
अचानक… ट्रंक के अंदर से काले धुएँ का गुबार निकला!
चारों ओर घुप्प अंधेरा छा गया।
और फिर…
रफीक को लगा, जैसे उसके पैरों के नीचे ज़मीन खिसक रही हो!
वो गिरने लगा…
कहीं गहरे अंधेरे में…
क्या रफीक इस भूतिया ट्रंक से बच पाएगा?
या उसका अतीत उसे निगल जाएगा?
"तूने मुझे मारा था, अब मैं तुझे अपनी दुनिया में खींच रहा हूँ!"
रफीक की आँखों के सामने अंधेरा छा गया।
वो गिर रहा था… एक गहरे, काले गड्ढे में!
"भाईजान!!" अमजद की चीख उसके कानों में गूँज रही थी।
लेकिन अब…
रफीक अकेला था।
कहाँ था वो?
उसने चारों तरफ़ देखा—
चारों ओर बस अंधेरा था… और सड़ी-गली लाशों की बदबू!
हवा में अजीब-सी सरसराहट थी… मानो कोई फुसफुसा रहा हो।
"रफीक… तू बच नहीं सकता…"
रफीक ने पीछे देखा—
वो सड़ा-गला इंसान अब उसके सामने खड़ा था!
लेकिन…
अब वो सिर्फ एक इंसान नहीं था…
उसके पीछे अनगिनत भूतिया परछाइयाँ खड़ी थीं!
उनकी आँखें खून जैसी लाल थीं।
"ये कौन हैं?"
रफीक ने काँपते हुए पूछा।
"ये वो हैं… जिनकी जान तुझ जैसे गुनहगारों ने ली है!"
रफीक पीछे हटने लगा—
"नहीं… मैंने किसी को नहीं मारा!"
"झूठ मत बोल… ये देख!"
भूत ने अपने सड़े-गले हाथ से हवा में इशारा किया—
अचानक अंधेरे में एक दृश्य उभर आया…
वही पुरानी सड़क…
रात का अंधेरा…
और रफीक… खून से सने हाथों के साथ खड़ा था!
उसके पैरों के पास एक आदमी की लाश पड़ी थी…
"ये… ये मैं नहीं हूँ!"
लेकिन अब रफीक को सब याद आ गया था…
पाँच साल पहले…
वो आदमी ट्रक के सामने आया था।
रफीक को लगा, "अगर ये ज़िंदा रहा, तो मैं फँस जाऊँगा!"
गुस्से और डर में उसने पत्थर उठाया… और उसके सिर पर मार दिया!
खून फैल गया… और उसकी साँसें बंद हो गईं।
रफीक ने जल्दी से उसकी लाश को जंगल में फेंक दिया…
और भाग निकला।
अब वापस वर्तमान में…
भूत अब रफीक के और करीब आ गया था!
"अब तेरी सज़ा शुरू होगी…"
रफीक ने भागने की कोशिश की—
लेकिन…
उसके पैरों में बेड़ियाँ पड़ गईं!
अब वो इस अंधेरी दुनिया में फँस चुका था!
क्या अब रफीक कभी इस श्राप से बाहर आ पाएगा?
"अब तू भी उन्हीं में शामिल होगा, रफीक!"
चारों तरफ़ अंधेरा था।
रफीक के पैरों में लोहे की बेड़ियाँ पड़ी थीं।
उसका पूरा शरीर काँप रहा था।
"नहीं! मुझे यहाँ से निकालो!"
लेकिन उसकी आवाज़ खोखले गड्ढे में गूँजकर वापस आई।
अचानक…
चारों ओर से भूतिया परछाइयाँ उसके पास आने लगीं।
उनकी आँखें लाल थीं… उनके मुँह से काले धुएँ निकल रहे थे।
"रफीक…"
"तेरे जैसे गुनहगार को यहीं रहना होगा!"
रफीक बुरी तरह से हाँफ रहा था।
उसने अपने पैरों की बेड़ियाँ छुड़ाने की कोशिश की—
लेकिन जैसे-जैसे वो छूटने की कोशिश करता, बेड़ियाँ और कसने लगतीं!
तभी…
कहीं दूर से किसी ने आवाज़ दी—
"भाईजान!!"
रफीक की आँखें खुली की खुली रह गईं।
ये अमजद की आवाज़ थी!
"अमजद! मैं यहाँ हूँ!"
रफीक पूरी ताकत से चिल्लाया।
लेकिन आवाज़ कहीं खो गई…
तभी अचानक…
ट्रंक एक बार फिर खुलने लगा!
"खट-खट-खट…"
रफीक की साँसें तेज़ हो गईं।
और जैसे ही ट्रंक पूरी तरह खुला…
एक सफेद धुंध से बना हाथ बाहर निकला… और रफीक की ओर बढ़ा!
"नहीं!!"
लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।
उस धुंधी हाथ ने रफीक को जकड़ लिया…
और…
खिंच कर ट्रंक के अंदर ले गया!
क्या रफीक हमेशा के लिए ट्रंक में क़ैद हो गया?
या अमजद उसे बचाने में कामयाब होगा?
"नहीं!! मुझे छोड़ दो!"
रफीक की चीखें अंधेरे में गूँज रही थीं।
ट्रंक ने उसे पूरी तरह से निगल लिया था।
अब वो कहीं और था…
एक काली, वीरान दुनिया में।
चारों तरफ़ कोहरा था।
ज़मीन कीचड़ जैसी… और हवा में बस गंध ही गंध!
"ये… मैं कहाँ आ गया?"
रफीक ने इधर-उधर देखा।
हर तरफ़ अजीब-अजीब आकृतियाँ घूम रही थीं।
कुछ इंसानों जैसी…
कुछ जानवरों जैसी…
और कुछ… ऐसी जिनका कोई आकार ही नहीं था!
"तू यहाँ से भाग नहीं सकता, रफीक!"
रफीक ने पीछे देखा—
वो भूत फिर उसके सामने खड़ा था।
"अब तू इसी दुनिया का हिस्सा बनेगा!"
रफीक ने डरते हुए कहा, "नहीं! मुझे जाने दो!"
लेकिन तभी…
"भाईजान!!"
रफीक की आँखें चौड़ी हो गईं।
ये अमजद की आवाज़ थी!
"अमजद! मैं यहाँ हूँ!"
रफीक ने पूरी ताकत से चिल्लाया।
दूसरी तरफ़…
अमजद ट्रक के पास खड़ा था।
उसने ट्रंक को ज़ोर से हिलाया, "भाईजान! बाहर आइए!"
ट्रंक से ठक-ठक की आवाज़ आने लगी!
अमजद समझ गया—
रफीक ट्रंक के अंदर फँस चुका था!
"भाईजान, मैं आपको बचाऊँगा!"
लेकिन क्या अमजद सही में रफीक को वापस ला पाएगा?
या फिर ट्रंक उसे भी निगल लेगा?
"भाईजान! हिम्मत रखिए, मैं आपको निकालूंगा!"
अमजद ने पूरी ताकत से ट्रंक को खींचा, लेकिन वो टस से मस नहीं हुआ।
दूसरी तरफ़… ट्रंक के अंदर…
रफीक घुटनों के बल गिर पड़ा था।
"मुझे बाहर निकलना होगा… नहीं तो ये जगह मेरी कब्र बन जाएगी!"
चारों ओर से अजीबोगरीब आवाज़ें आ रही थीं—
"रफीक… अब तेरा कोई भागने का रास्ता नहीं…"
वो सड़ा-गला भूत धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ रहा था।
उसकी आँखों से खून बह रहा था… और उसके सड़े हुए दाँतों से अजीब सी गंध आ रही थी।
"अब तुझे भी हमारे साथ रहना होगा!"
रफीक ने खुद को संभाला…
"नहीं! मैं यहाँ नहीं रह सकता!"
अचानक…
उसे एक धुंधली रोशनी दिखी!
"ये… ये क्या है?"
रफीक उस रोशनी की ओर भागा, लेकिन—
"धड़ाम!"
भूत ने उसे पीछे खींच लिया!
"तू नहीं जा सकता!"
रफीक ने पूरी ताकत लगाकर खुद को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन वो भूत और ताकतवर होता जा रहा था!
दूसरी तरफ़…
अमजद ने अचानक कुछ महसूस किया।
ट्रक का इंजन अपने आप चालू हो गया!
"या अल्लाह! ये क्या हो रहा है?"
ट्रंक से अब धुआँ निकलने लगा।
अमजद समझ गया कि कुछ बहुत गलत हो रहा है।
"भाईजान! मुझे कुछ करना होगा!"
अब सवाल ये था—
क्या अमजद सही वक्त पर रफीक को बचा पाएगा?
या ट्रंक उसे हमेशा के लिए निगल जाएगा?
"भाईजान! हिम्मत मत हारिए!"
अमजद ट्रक के पास खड़ा ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रहा था।
लेकिन ट्रंक अब भयानक तरीके से हिलने लगा था।
दूसरी तरफ़… ट्रंक के अंदर…
रफीक का दम घुटने लगा था!
भूत की पकड़ और मजबूत हो गई थी।
"अब तू इस अंधेरी दुनिया का हिस्सा बन गया है!"
रफीक की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा…
लेकिन तभी…
उसे अमजद की आवाज़ सुनाई दी!
"भाईजान! अल्लाह से दुआ कीजिए!"
रफीक ने काँपते होठों से कहा—
"या अल्लाह! मुझे माफ़ कर दे!"
अचानक…
ट्रंक के अंदर तेज़ रोशनी फैल गई!
भूत पीछे हटने लगे।
"नहीं!! ये मुमकिन नहीं!!"
रफीक ने अपनी पूरी ताकत लगाकर उस रोशनी की तरफ़ छलांग लगाई!
ट्रंक के बाहर…
अमजद ने पूरा ज़ोर लगाया और—
"धड़ाम!"
ट्रंक अचानक खुल गया!
और रफीक बाहर गिर पड़ा!
अमजद ने उसे पकड़ लिया, "भाईजान! आप ठीक हैं?"
रफीक बुरी तरह हाँफ रहा था।
"अमजद… हम इस ट्रंक को फेंक देंगे! ये शैतानी चीज़ है!"
लेकिन…
ट्रंक अभी भी हिल रहा था…
क्या वो शैतान अभी भी ज़िंदा था?
"भाईजान, हमें इस ट्रंक को नष्ट करना होगा!"
अमजद ने ट्रंक को ज़ोर से धक्का दिया, लेकिन वो जैसे ज़मीन से चिपक गया था।
रफीक अब भी सांसें तेज़ी से ले रहा था।
"अमजद… ये ट्रंक… हमें ज़िंदा नहीं छोड़ेगा!"
तभी…
ट्रंक अपने आप खुलने लगा!
"खट-खट-खट…"
अंदर से कोई चीज़ बाहर आने की कोशिश कर रही थी!
रफीक और अमजद पीछे हट गए।
अचानक…
एक भयानक चीख गूंजी!
"तुम मुझसे बच नहीं सकते!!"
और फिर…
ट्रंक से काले हाथ बाहर निकलने लगे!
उनकी उंगलियाँ लंबी और नुकीली थीं…
और आँखें जलती हुई कोयले की तरह चमक रही थीं!
"ये अब तक का सबसे बड़ा शैतान है!"
अमजद ने कांपते हुए कहा।
"हमें कुछ करना होगा!"
लेकिन क्या?
क्या ये ट्रंक उन्हें ज़िंदा निगल लेगा?
या रफीक और अमजद इसका कोई हल निकाल पाएंगे?
"अमजद, पीछे हटो!"
रफीक ने ज़ोर से चिल्लाया।
ट्रंक से काले धुंए की परछाइयाँ निकलने लगीं…
उनके चेहरे इंसानों जैसे थे, लेकिन उनकी आँखों में सिर्फ नफ़रत और आग थी!
"तुमने हमारी दुनिया को छेड़ा… अब इसकी सज़ा भुगतो!"
अचानक…
एक भूतिया हाथ तेज़ी से बढ़ा और अमजद की गर्दन पकड़ ली!
"भाईजान… मुझे बचाइए!!"
अमजद हवा में लटक गया।
रफीक के पास बस एक ही मौका था…
उसने अपने चारों तरफ़ देखा…
और फिर…
ट्रक का डीजल कैन उठाया!
"अगर ये ट्रंक शैतानी चीज़ है… तो इसे जलाना ही पड़ेगा!"
रफीक ने ट्रंक पर पूरा डीजल उड़ेल दिया!
"बिस्मिल्लाह…"
और फिर माचिस जला दी!
"धड़ाम!!!"
ट्रंक में आग भड़क उठी!
चीखें गूंज उठीं…
"नहीं!! तुम ये नहीं कर सकते!!!"
अमजद नीचे गिर पड़ा…
रफीक ने उसे खींचकर दूर किया।
ट्रंक जल रहा था… और उसके साथ वो शैतान भी…
कुछ देर बाद…
सबकुछ खामोश हो गया।
अमजद ने कांपते हुए कहा, "भाईजान… क्या सब खत्म हो गया?"
रफीक ने जलते हुए ट्रंक को देखा और कहा—
"शायद हाँ… लेकिन ये ट्रंक कभी भी लौट सकता है!"
क्या सच में सब खत्म हो गया?
या शैतान फिर लौटेगा?
"भाईजान… क्या ये सच में खत्म हो गया?"
अमजद ने काँपती आवाज़ में पूछा।
रफीक ने जलते हुए ट्रंक की राख को देखा और गहरी साँस ली।
"शायद… लेकिन हमें यहाँ से जल्दी निकलना होगा!"
दोनों ट्रक में बैठे और तेज़ी से वहाँ से निकल गए।
लेकिन…
पीछे, जलती हुई राख के अंदर…
कुछ धीरे-धीरे हिल रहा था!
"ये अभी खत्म नहीं हुआ…"
किसी ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा।
रास्ते में…
रफीक और अमजद अब भी घबराए हुए थे।
"भाईजान, हमें किसी मौलवी या पीर से मिलना चाहिए…"
रफीक ने हामी भरी, "हाँ, हम इस ट्रंक से आज़ाद तो हो गए… लेकिन ये शैतान कहीं और न चला जाए!"
तभी…
ट्रक के अंदर कुछ गिरने की आवाज़ आई!
"ठक!"
अमजद चौंककर पीछे मुड़ा, "भाईजान, ये आवाज़ कैसी थी?"
रफीक ने ट्रक रोका…
दोनों ने धीरे-धीरे कैबिन का दरवाज़ा खोला…
और फिर…
अमजद के चेहरे से खून उतर गया!
सीट के नीचे… एक पुराना ताबूत रखा था!
क्या शैतान वापस आ गया?
या ये किसी नए डर की शुरुआत थी?
"भाईजान… ये ताबूत यहाँ कैसे आया?"
अमजद की आवाज़ काँप रही थी।
रफीक ने धीरे-धीरे हाथ बढ़ाया और ताबूत को छूते ही—
"धड़ाम!"
ताबूत खुद-ब-खुद खुल गया!
और अंदर…
वही काला साया!
"तुम सोचते थे कि मुझसे बच जाओगे?"
"अब कोई बचने का रास्ता नहीं!"
अचानक…
ताबूत से कई काले हाथ निकलकर अमजद और रफीक की तरफ़ बढ़ने लगे!
"भागो भाईजान!!!"
लेकिन ट्रक स्टार्ट ही नहीं हो रहा था!
"हाहाहाहा!"
वो शैतान अब पूरी तरह बाहर आ गया था!
उसकी लाल जलती हुई आँखें… और सड़ी-गली हड्डियाँ…
रफीक और अमजद ने अपनी पूरी ताकत लगाई—
"धड़ाक!!"
अमजद ने दरवाज़ा खोला और दोनों ट्रक से कूद गए!
और फिर…
"गड़गड़ गड़गड़…"
ट्रक के अंदर से चीखें आने लगीं…
ट्रक अचानक हिलने लगा…
फिर अचानक—
"धड़ाम!!!!"
ट्रक में भयंकर विस्फोट हुआ!
रफीक और अमजद हवा में उछल गए!
कुछ देर बाद…
दोनों होश में आए…
"क्या वो खत्म हो गया?"
अमजद ने कांपते हुए पूछा।
रफीक ने जलते हुए ट्रक को देखा और कहा—
"पता नहीं… लेकिन डर कभी मरता नहीं!"
क्या ये सच में खत्म हुआ?
या शैतान फिर लौटेगा?
"भाईजान… अब क्या करेंगे?"
अमजद की आवाज़ काँप रही थी। उनके सामने ट्रक धू-धू कर जल रहा था।
रफीक ने लंबी सांस ली और कहा, "हमें यहां से निकलना होगा… ये जगह अब हमारे लिए महफूज़ नहीं है।"
लेकिन…
पीछे से कोई धीरे-धीरे हंस रहा था…
"हहहहहह… तुम सोचते हो कि ये खत्म हो गया?"
रफीक और अमजद के रोंगटे खड़े हो गए।
"अब तुम दोनों इस श्राप का हिस्सा बन चुके हो!"
अचानक…
चारों तरफ़ घना कोहरा छा गया।
रफीक ने अमजद का हाथ पकड़ा, "भागो!!!"
दोनों अंधेरे में दौड़ने लगे, लेकिन—
"धड़ाम!"
अचानक दोनों किसी चीज़ से टकरा गए…
और जब उन्होंने ऊपर देखा…
एक और ट्रंक उनके सामने रखा था…
और इस बार… वो खुद-ब-खुद खुल रहा था…
"तुम इस दायरे से कभी नहीं निकल सकते…"
क्या ये कहानी सच में खत्म होगी?
या ये डर अब हमेशा उनके साथ रहेगा?
"भाईजान… ये नया ट्रंक कहाँ से आया?"
अमजद ने घबराकर कहा।
रफीक ने डरते हुए ट्रंक की तरफ़ देखा।
ताबूत खुद-ब-खुद खुलने लगा…
"खर्र… खर्र… खर्र…"
अंदर एक सड़ा-गला चेहरा दिखा!
"तुम लोग बच नहीं सकते…"
और फिर…
चारों तरफ़ ज़मीन हिलने लगी!
अमजद और रफीक ज़मीन पर गिर पड़े।
तभी—
ट्रंक अचानक गायब हो गया!
रफीक ने इधर-उधर देखा, "ये क्या हो रहा है?"
अमजद ने कांपते हुए कहा, "भाईजान… हमें यहाँ से भागना होगा!"
लेकिन…
ज़मीन के नीचे एक दरवाज़ा खुल गया!
"नर्क का दरवाज़ा!"
अंदर से भयानक चीखें आने लगीं…
"तुम अब हमारे हो!"
अचानक…
दोनों के पैर ज़मीन में धंसने लगे!
"भाईजान!!!"
रफीक ने पूरी ताकत लगाई और अमजद का हाथ खींचा—
लेकिन वो नीचे गिरने लगा!
क्या रफीक अपने भाई को बचा पाएगा?
या ये डर हमेशा के लिए उनका नसीब बन जाएगा?
"भाईजान, मुझे बचाइए!"
अमजद ज़मीन के अंदर खिंचता जा रहा था।
रफीक ने पूरी ताकत लगाई, लेकिन अमजद धीरे-धीरे अंधेरे गड्ढे में समा रहा था।
"तुम लोग बच नहीं सकते…"
अचानक!
रफीक को अपनी जेब में वो ताबीज़ याद आया जो किसी बुजुर्ग ने दिया था।
"बिस्मिल्लाह…"
उसने ताबीज़ निकालकर ज़ोर से गड्ढे में फेंक दिया!
"धड़ाम!!!!"
अचानक—
भयानक चीखें गूंज उठीं…
अमजद का शरीर ऊपर आने लगा…
गड्ढे से आग की लपटें निकलीं और नर्क का दरवाज़ा बंद होने लगा!
"धप्प!"
अमजद ज़मीन पर गिर पड़ा।
रफीक ने उसे पकड़कर गले लगाया, "ख़ुदा का शुक्र है!"
सबकुछ शांत हो गया।
ट्रंक… गायब हो चुका था।
6 महीने बाद…
रफीक और अमजद ने ट्रांसपोर्ट का काम छोड़ दिया।
अब वे एक नई ज़िंदगी जी रहे थे।
लेकिन…
एक रात…
रफीक की दुकान पर एक अजनबी आया।
उसके पास एक पुराना ट्रंक था…
और उसने पूछा—
"भाईजान, क्या आप इसे खरीदेंगे?"
अंत… या एक नई शुरुआत?

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